भारतीय किसानों के साथ बनी, उनके लिए ढाली नहीं गई
पिछले चार से पाँच साल ये मशीनें भारतीय साझेदारों और किसानों के साथ, भारतीय फ़ार्मों पर विकसित हुई हैं। न विदेश में डिज़ाइन होकर यहाँ भेजी गईं, न किसी यूरोपीय लाइन पर लेबल बदलकर। जिन लोगों ने हमें बताया कि क्या ठीक करना है, वही लोग शेड चला रहे थे।
